Wednesday, 25 July 2012

इस गुजरते हुए वक्त को देख......!!

इस गुजरते हुए वक्त को देख 
और अपने कीमती जीवन को जाया होते हुए देख !
कोई निम्नतम-सी कसौटी को ही तू चुन,
और इस कसौटी पर खुद को ईमानदारी से परख !
जिस तरह यह वक्त गुजर जाएगा 
उसी तरह पागल तू भी वापस नहीं आएगा....!!
पगले,अपनी असीम ताकत को पहचान 
इस तरह बेचारगी को अपने भीतर मत पैदा कर 
हालात किसी भी काल बहुत अनुकूल नहीं हुए कभी 
कभी किसी के लिए भी नहीं..
सभी अपनी-अपनी लड़ाईयां इसी तरह लड़ा करते रहे हैं ओ पगले
फर्क बस इतना कि कोई अपने लिए,कोई सबके लिए !
तूने अपने जीवन को यह कैसा बना रखा है ओ मूर्ख...?
जीता तो है तू खुद के लिए,और बातें करता है बड़ी-बड़ी !
इस तरह की निंदा-आलोचना से क्या होगा....
सबसे पहले तुझे खुद को ही बदलना होगा
सबको उपदेश देने से पहले तू खुद के बारे में सोच...
सड़क पार आकर आम जनता के लिए जी....
तब यह धरती तेरी यह आकाश तेरा ही होगा...
अगर इस राह में मर भी गया तू
तो बच्चे-बच्चे की जुबान पर नाम तेरा ही होगा...!
मादरे-वतन की मिटटी से कभी गद्दारी मत कर-मत कर-मत कर
ज़िंदा अगर है तो आदमियत की मुखालिफत मत कर
सिर्फ कमा-खाकर अपने और अपने बच्चों के लिए जीना है फिर
अपनी खोल-भर में सिमटा रह ना,बड़ी-बड़ी बातें मत कर
तेरे वतन को तुझसे कभी कोई उम्मीद रत्ती भर भी नहीं रे मूर्ख !
तू अभी की अभी मर जा,नमक-हलाली की बातें मत कर...!!

Wednesday, 11 July 2012

हमारे सामने रास्ता ही नहीं होता

कभी-कभी ऐसा भी होता है
हमारे सामने रास्ता ही नहीं होता.....!!
और किसी उधेड़ बून में पड़ जाते हम....
खीजते हैं,परेशान होते हैं...
चारों तरफ़ अपनी अक्ल दौडाते हैंमगर रास्ता है कि नहीं ही मिलता....
अपने अनुभव के घोडे को हम....
चारों दिशाओं में दौडाते हैं......
कितनी ही तेज़ रफ़्तार से ये घोडे
हम तक लौट-लौट आते हैं वापस
बिना कोई मंजिल पाये हुए.....!!
रास्ता है कि नहीं मिलता......!!
हमारी सोच ही कहीं गूम हो जाती है......
रास्तों के बेनाम चौराहों में.....
ऐसे चौराहों पर अक्सर रास्ते भी
अनगिनत हो जाया करते हैं..........
और जिंदगी एक अंतहीन इम्तेहान.....!!!
अगर इसे एक कविता ना समझो
तो एक बात बताऊँ दोस्त.....??
रास्ता तो हर जगह ही होता है.....
अपनी सही जगह पर ही होता है.....
बस.....
हमें नज़र ही नहीं आता......!!!! 

तकलीफ में जीना बहुत मुश्किल होता है, होता है ना ?

तकलीफ में जीना बहुत मुश्किल होता है,
होता है ना ?
और जब हम यह जानते हों कि
इस तकलीफ को हम शायद मिटा भी नहीं सकते
तब ??
अपने निजी जीवन की तकलीफों को तो
अक्सर मिटा ही लेते हैं हम
कभी आसानी से तो कभी कठिनाईयों से
मगर अपने आस-पास और दूर की तकलीफों का क्या करें
जिनके बारे में रोज पढते हैं और देखते हैं !
हमारे ही आसपास बहुत सारे लुटेरे रहते हैं
जो तरह-तरह से हमारे वतन को लूटते हैं
और बेरहम हैं वो इतने कि
खुद के पकडे जाने के भय से
किसी की ह्त्या भी कर देते हैं,या करवा देते हैं !!
हमारे आस-पास हमारे राज्य या देश का लूटा जाना
कोई कुछ पैसों-भर का खेल नहीं है दोस्तों
यह खेल है करोडों का,अरबों का,खरबों का
मगर यह खेल कुल इतना भर भी नहीं दोस्तों
यह प्रश्न का वतन की आबरू का
इसके माथे का शर्म से झुक जाने का
और उसके बावजूद भी हमारे सत्तानशीनों की बेहयाई का
और अपनी तमाम करतूतों के बावजूद के जा रही थेथरई का !!
ऐसा क्यूँ है दोस्तों कि हमारे वतन में जो भी,जहां भी
सत्ता में है,मद में चूर है
और मादरे-वतन की इज्ज़त का उसे कुछ होश ही नहीं है !!
ऐसा क्यूँ है दोस्तों कि यहाँ हर ताकतवर
कमजोरों पर जुल्म-ही-जुल्म ढाने को तत्पर है
और किसी भी मानवीयता का उसमें लेश मात्र भी नहीं है.....
इस तकलीफ के साथ जीना मुश्किल ही नहीं,असंभव है दोस्तों
और अपनी या हम सबकी इस तकलीफ का क्या करना है
आईये हम सब मिलकर सोचते हैं
और सोचकर कुछ कर गुजरते हैं क्योंकि
तकलीफ में जीना बहुत मुश्किल होता है,
होता है ना ?

Sunday, 8 July 2012

एक बात तो बता अ दोस्त......

मुझसे ना मिलने की कसम खाता क्यूँ है ?
मेरी तस्वीर को सीने से लगाता क्यूँ है ?
अनदिखा सा रहता है क्यूँ मुझको यारब
और लोगों से मिरा दीदार कराता क्यूँ है ?
वक्त मरहम है,दिल को तसल्ली देता है,गर
तो फ़िर वो हमें खंजर चुभाता क्यूँ है ?
दिल को मेरे भी जरा तपिश तो ले लेने दे
साए से मेरे धुप चुरा कर ले जाता क्यूँ है ?
हश्र तक भी जो पूरे ना हों ऐसे मिरे यारब
सपने हम सबको दिखाता है,दिखाता क्यूँ है ?
तेरे चक्कर में घनचक्कर हुआ हूँ मैं
मेरी मर्ज़ी के खिलाफ मुझे चलाता क्यूँ है ?
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एक बात तो बता अ दोस्त......
तुझे प्यार करना अच्छा लगता है......
या नफरत करना..........??
धत्त.......
ये भी भला कोई पूछने की बात है.....
प्यार करना.....और क्या....!!
क्यूँ....अ मेरे दोस्त ??
क्यूंकि प्यार से ही दुनिया....
दुनिया बनी हुई रहती है.....!!
हुम्म्म्म्म्म्म्म
बस मेरे दोस्त.....
मुझे तुझसे यही पूछना था....!!