Monday, 21 May 2012

महफ़िल



तेरे मैं  के अर्थों में मुझे खो जाने दे...
इक ज़रा मुझ को खुद में ही खो जाने दे!!सामने बैठा भी नज़र ना आए तू मुझेऐसी बात है तो मुझको ही चला जाने दे !!
तेरी मर्ज़ी से आया तो हूँ अय मेरे खुदा 
अपनी मर्ज़ी से मुझे जीने दे,चला जाने दे!!

आँख ही आँख से बातें दे करने दे तू मुझेसाँस को साँस से जुड़ने दे उसे समाने दे!!
इक जरा जोर से दिल को मेरे  धड़कने तो दे 
इक
 जरा जोर से मुझे आज तू खिलखिलाने दे !!
मुझको मेरी ही कीमत ही नहीं पता ये खुदा 
इक तिरे सामने मुझे महफ़िल अपनी जमाने दे!!

Friday, 18 May 2012

न जाने क्यूँ

आज  फिर से वो मुझे अच्छी ल गी ...
 न   जाने क्यूँ अच्छी लगी।.
दिल    ने फिर से ताने बाने बुने 
और वो मुझे  अच्छी ल गी.. 
उसकी आँखों मैं फिर से दिल   खोने लगा ....
साडी रुस्बयिओं को भूल  फिर से प्यार करने लगा।..
उनकी आँखों मैं फिर से खो जाना चाहता हूँ।..
खुद से नहीं अब उनसे प्यार करना चाहता हूँ।..
बेईज्ज़ती के उस  पल को छोड़ कहीं आगे बढ़ना चाहता हूँ।.
उनकी बाँहों मैं अपने सर को रख  आँखे बंद करना चाहता हूँ।.
प्यार है उनसे बहुत उन्हें भी बताना चाहता हूँ।..
खुद से ज्यादा मुझ  पर  बिश्वास  करे ये जाताना चाहता हूँ।.
उसको कोई दुख न हो ये बताना चाहता हूँ।..
बस  उसको और   सिर्फ  उसको  प्यार करना चाहता हूँ।..