Friday, 18 May 2012

न जाने क्यूँ

आज  फिर से वो मुझे अच्छी ल गी ...
 न   जाने क्यूँ अच्छी लगी।.
दिल    ने फिर से ताने बाने बुने 
और वो मुझे  अच्छी ल गी.. 
उसकी आँखों मैं फिर से दिल   खोने लगा ....
साडी रुस्बयिओं को भूल  फिर से प्यार करने लगा।..
उनकी आँखों मैं फिर से खो जाना चाहता हूँ।..
खुद से नहीं अब उनसे प्यार करना चाहता हूँ।..
बेईज्ज़ती के उस  पल को छोड़ कहीं आगे बढ़ना चाहता हूँ।.
उनकी बाँहों मैं अपने सर को रख  आँखे बंद करना चाहता हूँ।.
प्यार है उनसे बहुत उन्हें भी बताना चाहता हूँ।..
खुद से ज्यादा मुझ  पर  बिश्वास  करे ये जाताना चाहता हूँ।.
उसको कोई दुख न हो ये बताना चाहता हूँ।..
बस  उसको और   सिर्फ  उसको  प्यार करना चाहता हूँ।..

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