Monday, 21 May 2012

महफ़िल



तेरे मैं  के अर्थों में मुझे खो जाने दे...
इक ज़रा मुझ को खुद में ही खो जाने दे!!सामने बैठा भी नज़र ना आए तू मुझेऐसी बात है तो मुझको ही चला जाने दे !!
तेरी मर्ज़ी से आया तो हूँ अय मेरे खुदा 
अपनी मर्ज़ी से मुझे जीने दे,चला जाने दे!!

आँख ही आँख से बातें दे करने दे तू मुझेसाँस को साँस से जुड़ने दे उसे समाने दे!!
इक जरा जोर से दिल को मेरे  धड़कने तो दे 
इक
 जरा जोर से मुझे आज तू खिलखिलाने दे !!
मुझको मेरी ही कीमत ही नहीं पता ये खुदा 
इक तिरे सामने मुझे महफ़िल अपनी जमाने दे!!

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