Saturday, 28 April 2012

खुद से ही अपनी इज्ज़त को तार तार कर दिया...
ये भी न देखा की किन किन को बेजार कर दिया...
दर्द है जो छुपाये छुप नहीं रहा है हर दर्द को कुरेद दिया...
इश्क करने चला था चुपचाप  से,पुरे महकमे को बता दिया...
रंग ऐसा उतरा  है इश्क का, की हर रंग काला कर दिया..
अपने ही आँखों से गीडा अपने दामन  को तार तार कर दिया..
बदलने चला था दोस्ती को प्यार में,नफरत में सबकुछ बदल दिया..
किन आँखों से नज़रों को मिलाऊँ नज़रों ने धोका दे दिया...
अपने ही हाथों से अपने प्यार का गला दबा दिया..
न तो अब  दोस्ती रही न ही प्यार का मौका  दिया..
क्या कहैं किस्से कहीं , कुछ कहने से भी मना कर दिया..
सरे तानेबाने को बुना था उसमें ही उलझा दिया..
खुद से कैसे नजरें मिलाऊँ  इसका भी अंदाज़ा न दिया... 

Wednesday, 25 April 2012

आज फिर उनसे बात हुई

आज फिर उनसे बात हुई,
न जाने क्यूँ उनसे बात हुई..
 कुछ पलों  की बात में 
 बस जज्बात थम सी  गयी..
वीराने मैं फिर उथल पुथल सी हुई..
वक़्त जो कहीं थमा था फिर से चल पड़ी..
बहुत कुछ कहना था उनसे
 फिर भी कुछ बात न हुई..
आवाज़ सुन कर दिल धक् सा गया
 जज़्बात कहीं  गाफूर हूई...
एक सकूँ सा दिल को मिला 
लेकिन हिम्मत फिर भी हार गयी...
मुझे पता है की मैं उसके लायक नहीं..
फिर भी दिल के हाथों मजबूर हुआ..
कर दिया अपने दिल को तार तार ..
अपने ही वादों को तोड़  दिया..
बस एक बार बात करने की चाह मैं 
अपने ही जखम कुरेद गया...
कैसे समझाओं इस दिल को जो 
अब भी उसे ही कहीं दुन्धता  है..
ना चाह कर भी भीड़  मैं उसे ही सोचता है..
अब फिर से दिल ने ली है कसम...
ना होगी अब बात उनसे कहीं...
अपने दिल को और न करूँगा तार तार....
हिम्मत रखूँगा और करूँगा बस खुद से प्यार...





Friday, 20 April 2012

Muskurahat



चाँद ने मुस्कुरा कर चांदनी से 
ये पूछा की बता तेरी रजा क्या है...
चांदनी भी इठलाई थोड़ी शरमाई 
बदन पर बादल  ओढ़ कर 
झरोखे से मुस्कुरायी..
फिर इतरा कर कहा
 मेरी रजा तो ताज से पूछ
जो मेरी रौशनी मैं यूँ जगमगाता है..
लोगों को प्यार के हर रंग बताता है..
हर रात मैं खड़ा मुस्कुराता है..
अगर तुन जानना ही चाहता  है मेरी रजा 
तो खुद को कर ले पूरा हमेशा के लिए..
मैं भी रहूंगी पूरी, ताज भी रहेगा पूरा..
प्यार भी मुस्कुरायेगा..
हर पल चांदनी बेखेरेगी जमीं पर..
प्यार हर पल तेरे आगोश मैं जगमगाएगा..
.

Thursday, 19 April 2012

Pyar ke Shabd

बातों ही बातों में दिल खो गया...
दो चार बातें क्या कर ली दिल भी दे दिया...
प्यार के मायनों का पता नहीं..
 दो पल में इजहार भी  कर दिया..
हर शब्द को गौर से सुना...
हर बात को दिल से कहा...
फिर भी दिल हार गया...
दिमाग चला न आगे कहीं..
उसकी एक अदा पर ठहर सा गया...
ठगने का डर  है बहुत...
फिर भी दिल हार  गया...
लव के इशारों का पता नहीं..
हर इशारों को  इजहार समझ गया  ,...
प्यार की उल्फत में हारा है दिल कहीं..
फिर भी प्यार के राह पर चल पड़ा..
कहने को होता है बहुत कुछ..
लकिन तीन शब्दों में प्यार सिमट कर रह गया..
फिर वही तीन शब्द कहीं खो से जाते हैं...
प्यार कहीं कोने में रह सा जाता है..
यादों के झरोके से झांकता है..\
फिर से अगले प्यार की तलाश में चल पड़ता है...
वहीँ बातें कहीं जो न कहनी थी फिर से कह पड़ता है..
बातों ही बातों में फिर दिल खो पड़ता है...



..

Tamanna

तमन्ना है बादलों में कहीं उड़ने की,
खोजने की बादल में उस पहले बूदों को,
जो धरा पर गिरती है सबसे पहले लेकिन,
उस से भी पहले अपने आभास  से खोलती 
पत्तियौं के कोमल अधरों को 
बिखेर देती है मुस्कराहट पेड के उस डाली पर
जिस पर खिलेगी फूल कल और 
बिखेरेगी अपनी घटा हर पल 
और उसकी खुसबू मैं सराबोर होगा ये जहाँ...,
बस तम्मना हस उस बूदों को खोजने की..
जो दे हर पल एक नया आभास एक नयी ताजगी ..
ताजगी जिन्दगी की, जिन्दगी मैं छुप्पी खुशियुं की..
खुशियुं मैं छिपी आसयुं की एक बूँद की 
जो छलक  आये खुशयुं के   साथ कहीं...



Sunday, 15 April 2012

Mere Jaisi

कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..
बचपन देखा तेरी आँखों मैं देखा जब तुने पहली बार...
छुआ जब नन्हे हाथों से तुने जी गया था मैं हरबार 
तेरे दमन से बंधी हर याद आज भी ऐसी ही है...
कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..
थोडा चल दिया था मैं जब तुने चलना सिखा था..
गिर कर फिर उठ  कर चलना  तूमसे ही तो सिखा था..
उन नन्हे क़दमों की याद आज भी बिलकुल वैसी है..
कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..
आंसूं गिर जाते थे मेरे जब रोना तुझको आता था..
डोली मैं फिर जाएगी तुन सोच कर फिर रो जाता था...
ख्वाशिओं  की वो मुलाकात आज भी वैसी  है..
कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..

Monday, 9 April 2012

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!


कब यहाँ से वहाँ.....कब कहाँ से कहाँ 
,
कितनी आवारा है ये मेरी जिंदगी !!

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!

कभी बनती सबा कभी बन जाती हवा ,

कितने रंगों भरी है मेरी ये जिंदगी !!

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!

नाचती कूदती-चिडियों सी फूदती 
,
चहचहाती-खिलखिलाती मेरी जिंदगी !!

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!

याद बनकर कभी,आह बनकर कभी
 ,
टिसटिसाती है अकसर मेरी जिंदगी !!

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!

जन्म से मौत तक,खिलौनों से ख़ाक तक

किस तरह बीत जाती है ये तन्हाँ जिंदगी !!

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!

Saturday, 7 April 2012

नासूर

क्या कहैं किससे कहें , 
अपने दिल को तेरी यादों से कैसे महफूज करैं..
तेरे जाने का गम इतना है साहिबा
की उस गम से खुद को कैसे आबाद करें..
तुझसे जब मिला था तो सोचा न था
 की ये  भी  कभी अंजाम होगा..
तुन मेरा रास्ते में हाथ छोड़ किसी और के साथ होगी..
ऐसे अंजामों का डर न था मुझे एक मेरी महबूबा .
तुन खुश रह ,हर हाल में चाहे किसी के साथ भी रह ...
 बस कसक होगी कहीं जो न साथ छोड़ेगी कहीं..
अपनी दिल से तुझे भुला न पाउँगा कहीं..
तेरी हर अदा अब मुझे नासूर बन चुभती है..
दिल के हर जखम को हर वक़्त कुरेदती है..
कोशिश बड़ी की कि तुझे में भूल जाऊं ..
लकिन क्या करूँ कि कोई इस दिल को भाती नहीं..
अब भी तेरी यादों में मैंने पलकें बिछा रखें हैं..
तुन लौट आ कहीं मैंने अब भी अरमान सजा रखें है..
भूल जाने को मैं तैयार हूँ तेरी रुस्बाएं ..
तुन लौट जा बस आकर बस जा मुझ मैं कहीं..
तेरी इंतजार है दिल मैं आज भी हर कोने में यहीं कहीं यहीं कहीं..



तुझसे