बातों ही बातों में दिल खो गया...
दो चार बातें क्या कर ली दिल भी दे दिया...
प्यार के मायनों का पता नहीं..
दो पल में इजहार भी कर दिया..
हर शब्द को गौर से सुना...
हर बात को दिल से कहा...
फिर भी दिल हार गया...
दिमाग चला न आगे कहीं..
उसकी एक अदा पर ठहर सा गया...
ठगने का डर है बहुत...
फिर भी दिल हार गया...
लव के इशारों का पता नहीं..
हर इशारों को इजहार समझ गया ,...
प्यार की उल्फत में हारा है दिल कहीं..
फिर भी प्यार के राह पर चल पड़ा..
कहने को होता है बहुत कुछ..
लकिन तीन शब्दों में प्यार सिमट कर रह गया..
फिर वही तीन शब्द कहीं खो से जाते हैं...
प्यार कहीं कोने में रह सा जाता है..
यादों के झरोके से झांकता है..\
फिर से अगले प्यार की तलाश में चल पड़ता है...
वहीँ बातें कहीं जो न कहनी थी फिर से कह पड़ता है..
बातों ही बातों में फिर दिल खो पड़ता है...
..
No comments:
Post a Comment