Friday, 20 April 2012

Muskurahat



चाँद ने मुस्कुरा कर चांदनी से 
ये पूछा की बता तेरी रजा क्या है...
चांदनी भी इठलाई थोड़ी शरमाई 
बदन पर बादल  ओढ़ कर 
झरोखे से मुस्कुरायी..
फिर इतरा कर कहा
 मेरी रजा तो ताज से पूछ
जो मेरी रौशनी मैं यूँ जगमगाता है..
लोगों को प्यार के हर रंग बताता है..
हर रात मैं खड़ा मुस्कुराता है..
अगर तुन जानना ही चाहता  है मेरी रजा 
तो खुद को कर ले पूरा हमेशा के लिए..
मैं भी रहूंगी पूरी, ताज भी रहेगा पूरा..
प्यार भी मुस्कुरायेगा..
हर पल चांदनी बेखेरेगी जमीं पर..
प्यार हर पल तेरे आगोश मैं जगमगाएगा..
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