कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..
बचपन देखा तेरी आँखों मैं देखा जब तुने पहली बार...
छुआ जब नन्हे हाथों से तुने जी गया था मैं हरबार
तेरे दमन से बंधी हर याद आज भी ऐसी ही है...
कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..
थोडा चल दिया था मैं जब तुने चलना सिखा था..
गिर कर फिर उठ कर चलना तूमसे ही तो सिखा था..
उन नन्हे क़दमों की याद आज भी बिलकुल वैसी है..
कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..
आंसूं गिर जाते थे मेरे जब रोना तुझको आता था..
डोली मैं फिर जाएगी तुन सोच कर फिर रो जाता था...
ख्वाशिओं की वो मुलाकात आज भी वैसी है..
कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..

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