Wednesday, 31 July 2013

एक ख्वाब़ सजा जाओ


ये रात ये तन्हाई
ये दिल के धड़कने की आवाज़
ये सन्नाटा
ये डूबते तारों की 
ख़ामोश ग़ज़ल खवानी
ये वक्त की पलकों पर 
सोती हुई वीरानी
जज़्बात-ए-मुहब्बत की
ये आख़िरी अंगड़ाई 
बजाती हुई हर जानिब 
ये मौत की शहनाई 
सब तुम को बुलाते हैं
पल भर को तुम आ जाओ
बंद होती मेरी आँखों में 
मुहब्बत का
एक ख्वाब़ सजा जाओ