Saturday, 4 August 2012

जो तेरा है वो तेरा तो नहीं है.......!!!!





जो तेरा है वो तेरा तो नहीं है,
जो मेरा है वो मेरा तो नहीं है !
जो जितना अच्छा दिखता है 
देखो,वो उतना भला तो नहीं है!
ठीक है,वो चारागर होगा मगर 
बस इतने से वो खुदा तो नहीं है !
नजदीक से देखने से लगता है,
कहीं वो मुझसे जुदा तो नहीं है !
रह-रह कर कुछ टीसता-सा है ,
कहीं मुझको कुछ हुआ तो नहीं है !
कुछ जो भी यहाँ पर गहरा-सा है,
कभी हर्फों में वो बयाँ तो नहीं है !
हर जगह वो मुझसे छुपता है 
कहीं वो मेरा राजदां तो नहीं है !
हर पल बस तेरा नाम लेता हूँ,
ओ मेरे खुदा रे कहाँ तू नहीं है !
हर हद तक जाकर तुझको खोजा 
कहीं तू मेरे दरमियाँ तो नहीं है !
हर्फों का शोर ये समझ ना आये 
कहीं तू हर्फों में ही निहां तो नहीं है !!

Wednesday, 25 July 2012

इस गुजरते हुए वक्त को देख......!!

इस गुजरते हुए वक्त को देख 
और अपने कीमती जीवन को जाया होते हुए देख !
कोई निम्नतम-सी कसौटी को ही तू चुन,
और इस कसौटी पर खुद को ईमानदारी से परख !
जिस तरह यह वक्त गुजर जाएगा 
उसी तरह पागल तू भी वापस नहीं आएगा....!!
पगले,अपनी असीम ताकत को पहचान 
इस तरह बेचारगी को अपने भीतर मत पैदा कर 
हालात किसी भी काल बहुत अनुकूल नहीं हुए कभी 
कभी किसी के लिए भी नहीं..
सभी अपनी-अपनी लड़ाईयां इसी तरह लड़ा करते रहे हैं ओ पगले
फर्क बस इतना कि कोई अपने लिए,कोई सबके लिए !
तूने अपने जीवन को यह कैसा बना रखा है ओ मूर्ख...?
जीता तो है तू खुद के लिए,और बातें करता है बड़ी-बड़ी !
इस तरह की निंदा-आलोचना से क्या होगा....
सबसे पहले तुझे खुद को ही बदलना होगा
सबको उपदेश देने से पहले तू खुद के बारे में सोच...
सड़क पार आकर आम जनता के लिए जी....
तब यह धरती तेरी यह आकाश तेरा ही होगा...
अगर इस राह में मर भी गया तू
तो बच्चे-बच्चे की जुबान पर नाम तेरा ही होगा...!
मादरे-वतन की मिटटी से कभी गद्दारी मत कर-मत कर-मत कर
ज़िंदा अगर है तो आदमियत की मुखालिफत मत कर
सिर्फ कमा-खाकर अपने और अपने बच्चों के लिए जीना है फिर
अपनी खोल-भर में सिमटा रह ना,बड़ी-बड़ी बातें मत कर
तेरे वतन को तुझसे कभी कोई उम्मीद रत्ती भर भी नहीं रे मूर्ख !
तू अभी की अभी मर जा,नमक-हलाली की बातें मत कर...!!

Wednesday, 11 July 2012

हमारे सामने रास्ता ही नहीं होता

कभी-कभी ऐसा भी होता है
हमारे सामने रास्ता ही नहीं होता.....!!
और किसी उधेड़ बून में पड़ जाते हम....
खीजते हैं,परेशान होते हैं...
चारों तरफ़ अपनी अक्ल दौडाते हैंमगर रास्ता है कि नहीं ही मिलता....
अपने अनुभव के घोडे को हम....
चारों दिशाओं में दौडाते हैं......
कितनी ही तेज़ रफ़्तार से ये घोडे
हम तक लौट-लौट आते हैं वापस
बिना कोई मंजिल पाये हुए.....!!
रास्ता है कि नहीं मिलता......!!
हमारी सोच ही कहीं गूम हो जाती है......
रास्तों के बेनाम चौराहों में.....
ऐसे चौराहों पर अक्सर रास्ते भी
अनगिनत हो जाया करते हैं..........
और जिंदगी एक अंतहीन इम्तेहान.....!!!
अगर इसे एक कविता ना समझो
तो एक बात बताऊँ दोस्त.....??
रास्ता तो हर जगह ही होता है.....
अपनी सही जगह पर ही होता है.....
बस.....
हमें नज़र ही नहीं आता......!!!! 

तकलीफ में जीना बहुत मुश्किल होता है, होता है ना ?

तकलीफ में जीना बहुत मुश्किल होता है,
होता है ना ?
और जब हम यह जानते हों कि
इस तकलीफ को हम शायद मिटा भी नहीं सकते
तब ??
अपने निजी जीवन की तकलीफों को तो
अक्सर मिटा ही लेते हैं हम
कभी आसानी से तो कभी कठिनाईयों से
मगर अपने आस-पास और दूर की तकलीफों का क्या करें
जिनके बारे में रोज पढते हैं और देखते हैं !
हमारे ही आसपास बहुत सारे लुटेरे रहते हैं
जो तरह-तरह से हमारे वतन को लूटते हैं
और बेरहम हैं वो इतने कि
खुद के पकडे जाने के भय से
किसी की ह्त्या भी कर देते हैं,या करवा देते हैं !!
हमारे आस-पास हमारे राज्य या देश का लूटा जाना
कोई कुछ पैसों-भर का खेल नहीं है दोस्तों
यह खेल है करोडों का,अरबों का,खरबों का
मगर यह खेल कुल इतना भर भी नहीं दोस्तों
यह प्रश्न का वतन की आबरू का
इसके माथे का शर्म से झुक जाने का
और उसके बावजूद भी हमारे सत्तानशीनों की बेहयाई का
और अपनी तमाम करतूतों के बावजूद के जा रही थेथरई का !!
ऐसा क्यूँ है दोस्तों कि हमारे वतन में जो भी,जहां भी
सत्ता में है,मद में चूर है
और मादरे-वतन की इज्ज़त का उसे कुछ होश ही नहीं है !!
ऐसा क्यूँ है दोस्तों कि यहाँ हर ताकतवर
कमजोरों पर जुल्म-ही-जुल्म ढाने को तत्पर है
और किसी भी मानवीयता का उसमें लेश मात्र भी नहीं है.....
इस तकलीफ के साथ जीना मुश्किल ही नहीं,असंभव है दोस्तों
और अपनी या हम सबकी इस तकलीफ का क्या करना है
आईये हम सब मिलकर सोचते हैं
और सोचकर कुछ कर गुजरते हैं क्योंकि
तकलीफ में जीना बहुत मुश्किल होता है,
होता है ना ?

Sunday, 8 July 2012

एक बात तो बता अ दोस्त......

मुझसे ना मिलने की कसम खाता क्यूँ है ?
मेरी तस्वीर को सीने से लगाता क्यूँ है ?
अनदिखा सा रहता है क्यूँ मुझको यारब
और लोगों से मिरा दीदार कराता क्यूँ है ?
वक्त मरहम है,दिल को तसल्ली देता है,गर
तो फ़िर वो हमें खंजर चुभाता क्यूँ है ?
दिल को मेरे भी जरा तपिश तो ले लेने दे
साए से मेरे धुप चुरा कर ले जाता क्यूँ है ?
हश्र तक भी जो पूरे ना हों ऐसे मिरे यारब
सपने हम सबको दिखाता है,दिखाता क्यूँ है ?
तेरे चक्कर में घनचक्कर हुआ हूँ मैं
मेरी मर्ज़ी के खिलाफ मुझे चलाता क्यूँ है ?
०००००००००००००००००००००००००००००००००००
०००००००००००००००००००००००००००००००००००
एक बात तो बता अ दोस्त......
तुझे प्यार करना अच्छा लगता है......
या नफरत करना..........??
धत्त.......
ये भी भला कोई पूछने की बात है.....
प्यार करना.....और क्या....!!
क्यूँ....अ मेरे दोस्त ??
क्यूंकि प्यार से ही दुनिया....
दुनिया बनी हुई रहती है.....!!
हुम्म्म्म्म्म्म्म
बस मेरे दोस्त.....
मुझे तुझसे यही पूछना था....!!

Thursday, 7 June 2012

सितम

 कहने  को  बातें  हैं  कई जो दिल मैं है दबी कहीं ,
कहना चाहता तो हूँ हर बातें अभी पर जुबान है  कहीं।
बातें अपनों की है जो कह न सकता हर किसी से कहीं।.
बस  दिल ही दिल मैं गुनगुनाता हूँ बातें खुद से कहीं।.\
अपनों के सितम का आखिर किस्से फरियाद करैं कहीं
न चाहते हुए  भी इस दिल से उन्हें कैसे बर्बाद करैं कहीं।.
आलम  है रूसबयुं का ऐसा की हर  बात है अब दबी  कहीं।
बातें बातों मैं ही दब गयी  खो गयी न जाने कहीं।.
कहना है हर बात उनसे जिन बातों ने  बड़ाई  दूरियां कहीं।.
आलम है अब ऐसा की दुश्मन दोस्त हुआ कहीं ...
इज्ज़त का भी ख्याल न रखा उन्हों कहीं।.
खुद को तार तार किया ही मुझे भी रुस्बा किया
यहीं कहीं यहीं कहीं।/.....

  

Monday, 21 May 2012

महफ़िल



तेरे मैं  के अर्थों में मुझे खो जाने दे...
इक ज़रा मुझ को खुद में ही खो जाने दे!!सामने बैठा भी नज़र ना आए तू मुझेऐसी बात है तो मुझको ही चला जाने दे !!
तेरी मर्ज़ी से आया तो हूँ अय मेरे खुदा 
अपनी मर्ज़ी से मुझे जीने दे,चला जाने दे!!

आँख ही आँख से बातें दे करने दे तू मुझेसाँस को साँस से जुड़ने दे उसे समाने दे!!
इक जरा जोर से दिल को मेरे  धड़कने तो दे 
इक
 जरा जोर से मुझे आज तू खिलखिलाने दे !!
मुझको मेरी ही कीमत ही नहीं पता ये खुदा 
इक तिरे सामने मुझे महफ़िल अपनी जमाने दे!!

Friday, 18 May 2012

न जाने क्यूँ

आज  फिर से वो मुझे अच्छी ल गी ...
 न   जाने क्यूँ अच्छी लगी।.
दिल    ने फिर से ताने बाने बुने 
और वो मुझे  अच्छी ल गी.. 
उसकी आँखों मैं फिर से दिल   खोने लगा ....
साडी रुस्बयिओं को भूल  फिर से प्यार करने लगा।..
उनकी आँखों मैं फिर से खो जाना चाहता हूँ।..
खुद से नहीं अब उनसे प्यार करना चाहता हूँ।..
बेईज्ज़ती के उस  पल को छोड़ कहीं आगे बढ़ना चाहता हूँ।.
उनकी बाँहों मैं अपने सर को रख  आँखे बंद करना चाहता हूँ।.
प्यार है उनसे बहुत उन्हें भी बताना चाहता हूँ।..
खुद से ज्यादा मुझ  पर  बिश्वास  करे ये जाताना चाहता हूँ।.
उसको कोई दुख न हो ये बताना चाहता हूँ।..
बस  उसको और   सिर्फ  उसको  प्यार करना चाहता हूँ।..

Saturday, 28 April 2012

खुद से ही अपनी इज्ज़त को तार तार कर दिया...
ये भी न देखा की किन किन को बेजार कर दिया...
दर्द है जो छुपाये छुप नहीं रहा है हर दर्द को कुरेद दिया...
इश्क करने चला था चुपचाप  से,पुरे महकमे को बता दिया...
रंग ऐसा उतरा  है इश्क का, की हर रंग काला कर दिया..
अपने ही आँखों से गीडा अपने दामन  को तार तार कर दिया..
बदलने चला था दोस्ती को प्यार में,नफरत में सबकुछ बदल दिया..
किन आँखों से नज़रों को मिलाऊँ नज़रों ने धोका दे दिया...
अपने ही हाथों से अपने प्यार का गला दबा दिया..
न तो अब  दोस्ती रही न ही प्यार का मौका  दिया..
क्या कहैं किस्से कहीं , कुछ कहने से भी मना कर दिया..
सरे तानेबाने को बुना था उसमें ही उलझा दिया..
खुद से कैसे नजरें मिलाऊँ  इसका भी अंदाज़ा न दिया... 

Wednesday, 25 April 2012

आज फिर उनसे बात हुई

आज फिर उनसे बात हुई,
न जाने क्यूँ उनसे बात हुई..
 कुछ पलों  की बात में 
 बस जज्बात थम सी  गयी..
वीराने मैं फिर उथल पुथल सी हुई..
वक़्त जो कहीं थमा था फिर से चल पड़ी..
बहुत कुछ कहना था उनसे
 फिर भी कुछ बात न हुई..
आवाज़ सुन कर दिल धक् सा गया
 जज़्बात कहीं  गाफूर हूई...
एक सकूँ सा दिल को मिला 
लेकिन हिम्मत फिर भी हार गयी...
मुझे पता है की मैं उसके लायक नहीं..
फिर भी दिल के हाथों मजबूर हुआ..
कर दिया अपने दिल को तार तार ..
अपने ही वादों को तोड़  दिया..
बस एक बार बात करने की चाह मैं 
अपने ही जखम कुरेद गया...
कैसे समझाओं इस दिल को जो 
अब भी उसे ही कहीं दुन्धता  है..
ना चाह कर भी भीड़  मैं उसे ही सोचता है..
अब फिर से दिल ने ली है कसम...
ना होगी अब बात उनसे कहीं...
अपने दिल को और न करूँगा तार तार....
हिम्मत रखूँगा और करूँगा बस खुद से प्यार...





Friday, 20 April 2012

Muskurahat



चाँद ने मुस्कुरा कर चांदनी से 
ये पूछा की बता तेरी रजा क्या है...
चांदनी भी इठलाई थोड़ी शरमाई 
बदन पर बादल  ओढ़ कर 
झरोखे से मुस्कुरायी..
फिर इतरा कर कहा
 मेरी रजा तो ताज से पूछ
जो मेरी रौशनी मैं यूँ जगमगाता है..
लोगों को प्यार के हर रंग बताता है..
हर रात मैं खड़ा मुस्कुराता है..
अगर तुन जानना ही चाहता  है मेरी रजा 
तो खुद को कर ले पूरा हमेशा के लिए..
मैं भी रहूंगी पूरी, ताज भी रहेगा पूरा..
प्यार भी मुस्कुरायेगा..
हर पल चांदनी बेखेरेगी जमीं पर..
प्यार हर पल तेरे आगोश मैं जगमगाएगा..
.

Thursday, 19 April 2012

Pyar ke Shabd

बातों ही बातों में दिल खो गया...
दो चार बातें क्या कर ली दिल भी दे दिया...
प्यार के मायनों का पता नहीं..
 दो पल में इजहार भी  कर दिया..
हर शब्द को गौर से सुना...
हर बात को दिल से कहा...
फिर भी दिल हार गया...
दिमाग चला न आगे कहीं..
उसकी एक अदा पर ठहर सा गया...
ठगने का डर  है बहुत...
फिर भी दिल हार  गया...
लव के इशारों का पता नहीं..
हर इशारों को  इजहार समझ गया  ,...
प्यार की उल्फत में हारा है दिल कहीं..
फिर भी प्यार के राह पर चल पड़ा..
कहने को होता है बहुत कुछ..
लकिन तीन शब्दों में प्यार सिमट कर रह गया..
फिर वही तीन शब्द कहीं खो से जाते हैं...
प्यार कहीं कोने में रह सा जाता है..
यादों के झरोके से झांकता है..\
फिर से अगले प्यार की तलाश में चल पड़ता है...
वहीँ बातें कहीं जो न कहनी थी फिर से कह पड़ता है..
बातों ही बातों में फिर दिल खो पड़ता है...



..

Tamanna

तमन्ना है बादलों में कहीं उड़ने की,
खोजने की बादल में उस पहले बूदों को,
जो धरा पर गिरती है सबसे पहले लेकिन,
उस से भी पहले अपने आभास  से खोलती 
पत्तियौं के कोमल अधरों को 
बिखेर देती है मुस्कराहट पेड के उस डाली पर
जिस पर खिलेगी फूल कल और 
बिखेरेगी अपनी घटा हर पल 
और उसकी खुसबू मैं सराबोर होगा ये जहाँ...,
बस तम्मना हस उस बूदों को खोजने की..
जो दे हर पल एक नया आभास एक नयी ताजगी ..
ताजगी जिन्दगी की, जिन्दगी मैं छुप्पी खुशियुं की..
खुशियुं मैं छिपी आसयुं की एक बूँद की 
जो छलक  आये खुशयुं के   साथ कहीं...



Sunday, 15 April 2012

Mere Jaisi

कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..
बचपन देखा तेरी आँखों मैं देखा जब तुने पहली बार...
छुआ जब नन्हे हाथों से तुने जी गया था मैं हरबार 
तेरे दमन से बंधी हर याद आज भी ऐसी ही है...
कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..
थोडा चल दिया था मैं जब तुने चलना सिखा था..
गिर कर फिर उठ  कर चलना  तूमसे ही तो सिखा था..
उन नन्हे क़दमों की याद आज भी बिलकुल वैसी है..
कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..
आंसूं गिर जाते थे मेरे जब रोना तुझको आता था..
डोली मैं फिर जाएगी तुन सोच कर फिर रो जाता था...
ख्वाशिओं  की वो मुलाकात आज भी वैसी  है..
कहते हैं सब की तुन बिलकुल मेरे जैसी है..

Monday, 9 April 2012

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!


कब यहाँ से वहाँ.....कब कहाँ से कहाँ 
,
कितनी आवारा है ये मेरी जिंदगी !!

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!

कभी बनती सबा कभी बन जाती हवा ,

कितने रंगों भरी है मेरी ये जिंदगी !!

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!

नाचती कूदती-चिडियों सी फूदती 
,
चहचहाती-खिलखिलाती मेरी जिंदगी !!

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!

याद बनकर कभी,आह बनकर कभी
 ,
टिसटिसाती है अकसर मेरी जिंदगी !!

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!

जन्म से मौत तक,खिलौनों से ख़ाक तक

किस तरह बीत जाती है ये तन्हाँ जिंदगी !!

जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !!

Saturday, 7 April 2012

नासूर

क्या कहैं किससे कहें , 
अपने दिल को तेरी यादों से कैसे महफूज करैं..
तेरे जाने का गम इतना है साहिबा
की उस गम से खुद को कैसे आबाद करें..
तुझसे जब मिला था तो सोचा न था
 की ये  भी  कभी अंजाम होगा..
तुन मेरा रास्ते में हाथ छोड़ किसी और के साथ होगी..
ऐसे अंजामों का डर न था मुझे एक मेरी महबूबा .
तुन खुश रह ,हर हाल में चाहे किसी के साथ भी रह ...
 बस कसक होगी कहीं जो न साथ छोड़ेगी कहीं..
अपनी दिल से तुझे भुला न पाउँगा कहीं..
तेरी हर अदा अब मुझे नासूर बन चुभती है..
दिल के हर जखम को हर वक़्त कुरेदती है..
कोशिश बड़ी की कि तुझे में भूल जाऊं ..
लकिन क्या करूँ कि कोई इस दिल को भाती नहीं..
अब भी तेरी यादों में मैंने पलकें बिछा रखें हैं..
तुन लौट आ कहीं मैंने अब भी अरमान सजा रखें है..
भूल जाने को मैं तैयार हूँ तेरी रुस्बाएं ..
तुन लौट जा बस आकर बस जा मुझ मैं कहीं..
तेरी इंतजार है दिल मैं आज भी हर कोने में यहीं कहीं यहीं कहीं..



तुझसे