कब यहाँ से वहाँ.....कब कहाँ से कहाँ
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कितनी आवारा है ये मेरी जिंदगी !!
जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !! कभी बनती सबा कभी बन जाती हवा , कितने रंगों भरी है मेरी ये जिंदगी !! जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !! नाचती कूदती-चिडियों सी फूदती
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चहचहाती-खिलखिलाती मेरी जिंदगी !! जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !! याद बनकर कभी,आह बनकर कभी
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टिसटिसाती है अकसर मेरी जिंदगी !! जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !! जन्म से मौत तक,खिलौनों से ख़ाक तक किस तरह बीत जाती है ये तन्हाँ जिंदगी !! जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी-जिंदगी !! |
kavi majburi hai zindgi to kavi saburi zindgi...khushi aur gum ke bina adhuri zindgi....
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