Thursday, 19 April 2012

Tamanna

तमन्ना है बादलों में कहीं उड़ने की,
खोजने की बादल में उस पहले बूदों को,
जो धरा पर गिरती है सबसे पहले लेकिन,
उस से भी पहले अपने आभास  से खोलती 
पत्तियौं के कोमल अधरों को 
बिखेर देती है मुस्कराहट पेड के उस डाली पर
जिस पर खिलेगी फूल कल और 
बिखेरेगी अपनी घटा हर पल 
और उसकी खुसबू मैं सराबोर होगा ये जहाँ...,
बस तम्मना हस उस बूदों को खोजने की..
जो दे हर पल एक नया आभास एक नयी ताजगी ..
ताजगी जिन्दगी की, जिन्दगी मैं छुप्पी खुशियुं की..
खुशियुं मैं छिपी आसयुं की एक बूँद की 
जो छलक  आये खुशयुं के   साथ कहीं...



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