क्या कहैं किससे कहें ,
अपने दिल को तेरी यादों से कैसे महफूज करैं..
अपने दिल को तेरी यादों से कैसे महफूज करैं..
तेरे जाने का गम इतना है साहिबा
की उस गम से खुद को कैसे आबाद करें..
की उस गम से खुद को कैसे आबाद करें..
तुझसे जब मिला था तो सोचा न था
की ये भी कभी अंजाम होगा..
की ये भी कभी अंजाम होगा..
तुन मेरा रास्ते में हाथ छोड़ किसी और के साथ होगी..
ऐसे अंजामों का डर न था मुझे एक मेरी महबूबा .
तुन खुश रह ,हर हाल में चाहे किसी के साथ भी रह ...
बस कसक होगी कहीं जो न साथ छोड़ेगी कहीं..
अपनी दिल से तुझे भुला न पाउँगा कहीं..
तेरी हर अदा अब मुझे नासूर बन चुभती है..
दिल के हर जखम को हर वक़्त कुरेदती है..
कोशिश बड़ी की कि तुझे में भूल जाऊं ..
लकिन क्या करूँ कि कोई इस दिल को भाती नहीं..
अब भी तेरी यादों में मैंने पलकें बिछा रखें हैं..
तुन लौट आ कहीं मैंने अब भी अरमान सजा रखें है..
भूल जाने को मैं तैयार हूँ तेरी रुस्बाएं ..
तुन लौट जा बस आकर बस जा मुझ मैं कहीं..
तेरी इंतजार है दिल मैं आज भी हर कोने में यहीं कहीं यहीं कहीं..
ऐसे अंजामों का डर न था मुझे एक मेरी महबूबा .
तुन खुश रह ,हर हाल में चाहे किसी के साथ भी रह ...
बस कसक होगी कहीं जो न साथ छोड़ेगी कहीं..
अपनी दिल से तुझे भुला न पाउँगा कहीं..
तेरी हर अदा अब मुझे नासूर बन चुभती है..
दिल के हर जखम को हर वक़्त कुरेदती है..
कोशिश बड़ी की कि तुझे में भूल जाऊं ..
लकिन क्या करूँ कि कोई इस दिल को भाती नहीं..
अब भी तेरी यादों में मैंने पलकें बिछा रखें हैं..
तुन लौट आ कहीं मैंने अब भी अरमान सजा रखें है..
भूल जाने को मैं तैयार हूँ तेरी रुस्बाएं ..
तुन लौट जा बस आकर बस जा मुझ मैं कहीं..
तेरी इंतजार है दिल मैं आज भी हर कोने में यहीं कहीं यहीं कहीं..
तुझसे

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