Wednesday, 28 January 2015

मिलते जुलते बातें करते रहो यारों...

किसी ने क्या खूब कहा है...
बख्शे जाते हैं वो लोग जिनकी किस्मत खराब होती है...
खुदा उन्हें नहीं बख्शता जिनकी नीयत खराब होती है...
न मेरा एक होगा... न तेरा लाख होगा...
न तारिफ तेरी होगी... न मजाक मेरा होगा...
गुरूर न कर शाहे शरीर का,
मेरा भी खाक होगा, तेरा भी खाक होगा...
जिंदगी भर ब्रांडेड ब्रांडेड करने वालों...
याद रखना कफन का कोई ब्रांड नहीं होता...
कोई रो कर दिल बहलाता है, कोई हंस कर दर्द छिपाता है
क्या करामात है कुदरत का यारों, जिंदा इंसान पानी में डूब जाता है..
और मुर्दा तैर कर दिखाता है....
मौत को देखा तो नहीं शायद वो बहुत खूबसूरत होगी...
कमबख्त जो भी उससे मिलता है जीना छोड़ देता है...
गजब की एकता देखी लोगों की जमाने में...
जिंदों को गिराने में और मुर्दों को उठाने में...
जिंदगी में न जाने कौन सी बात आखिरी होगी...
न जाने कौन सी रात आखिरी होगी...
मिलते जुलते बातें करते रहो यारों

एक दूसरे से न जाने कौन सी मुलाकात आखिरी होगी...

Friday, 9 January 2015

मेरी तस्वीर को सीने से लगाता क्यूँ है

मेरी तस्वीर को सीने से लगाता क्यूँ है

मुझसे ना मिलने की कसम खाता क्यूँ है ?
मेरी तस्वीर को सीने से लगाता क्यूँ है ?
अनदिखा सा रहता है क्यूँ मुझको यारब
और लोगों से मिरा दीदार कराता क्यूँ है ?
वक्त मरहम है,दिल को तसल्ली देता है,गर
तो फ़िर वो हमें खंजर चुभाता क्यूँ है ?
दिल को मेरे भी जरा तपिश तो ले लेने दे
साए से मेरे धुप चुरा कर ले जाता क्यूँ है ?
हश्र तक भी जो पूरे ना हों ऐसे मिरे यारब
सपने हम सबको दिखाता है,दिखाता क्यूँ है ?
तेरे चक्कर में घनचक्कर हुआ हूँ मैं "गाफिल"
मेरी मर्ज़ी के खिलाफ मुझे चलाता क्यूँ है ?
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एक बात तो बता अ दोस्त......
तुझे प्यार करना अच्छा लगता है......
या नफरत करना..........??
धत्त.......
ये भी भला कोई पूछने की बात है.....
प्यार करना.....और क्या....!!
क्यूँ....अ मेरे दोस्त ??
क्यूंकि प्यार से ही दुनिया....
दुनिया बनी हुई रहती है.....!!
बस मेरे दोस्त.....
मुझे तुझसे यही पूछना था....!!