एक ख्वाब़ सजा जाओ
ये रात ये तन्हाईये दिल के धड़कने की आवाज़ये सन्नाटाये डूबते तारों की ख़ामोश ग़ज़ल खवानीये वक्त की पलकों पर सोती हुई वीरानीजज़्बात-ए-मुहब्बत कीये आख़िरी अंगड़ाई बजाती हुई हर जानिब ये मौत की शहनाई सब तुम को बुलाते हैंपल भर को तुम आ जाओबंद होती मेरी आँखों में मुहब्बत काएक ख्वाब़ सजा जाओ
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