Saturday, 10 August 2013

आशियाना बदल लिया

आसमान के परिंदो ने भी अपना आशियाना बदल लिया
अनवरत सी बहती पानी ने किनारा बदल लिया...
दुशमन भी अब करते हैं छुप कर घुसपैठ
बंदुकों नें भी अपना निशाना बदल लिया
दुशमनों का भीर में छुपा रहनुमा कौन है..
दोस्तों ने भी दोस्ती का पैमाना बदल लिया..
छत पर आती थी धुप खिलकर कभी...
अब तो रौशनी ने भी अपना किनारा बदल लिया...
चॉंद जो छत पर आ शीतल कर जाती थी...
पता नहीं क्यों उसने तासीर बदल ली...
क्या गलती है मेरी कोई मुझे भी कह जाये

मेरे दोस्तों ने मुझसे दोस्ती बदल लीया...

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