Friday, 17 February 2012

उल्टा पुल्टा

सोचो की एक दिन ऐसा हो ,सबकुछ उल्टा पुल्टा हो ,
दिन मैं निकले चाँद , और रात मैं सवेरा हो.
नदी से मछलियाँ बहार आयें और इंसान समंदर मैं गोता लगाये...
झीलों मैं पछियाँ काह्काह्ये , और कोएल रात मैं गाना गए..
सोचो की जरा चूहे बिल्ली की दोस्ती हो जाये..
टॉम एंड जेर्री की कहानी मैं अलग सा ही ट्विस्ट आ जाये..
दोनों प्यार से बातें करैं और मलाई कोई और खाए..
शेर हिरन के आगे नतमस्तक हो, और गधा अपनी राज चलाये ..
बीबी सोफे पर बैठे आर्डर दे, और शोहर दूम  हिलाए..
लजीज वंजन रोड पर फ्री मैं कोई छोड़ जाये 
और हर गरीब मजे से उसका लुतुफ़ उठाए...
गरीब के पास पैसे हो जाये 
और अमीर व् उनके साथ राशन मैं लाइन लगाये ,
अपनी तो इतनी सी चाहत है की कुछ उल्टा पुल्टा हो जाये.
और हर इंसान एक दुसरे  इंसान के साथ खड़ा मुस्कुराये.... इन्द्र मोहन 

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