Monday, 20 February 2012

ग़लतफ़हमी


हर एक को ऐसा लगता है ..
की दुनिया उसी के अनुसार चलती है ....
मेरी भी ये ग़लतफ़हमी थी ..
जो अब मुझसे दूर कहीं बसती है....
एक समय ऐसा भी था ,
जब मैं सबसे कहीं दूर तो किसी के अनुसार भी था ....
आज मैं सबके कहीं पास ,
तो खुद के अनुसार हूँ...
बस ग़लतफ़हमी कहीं दूर है ,
 और मैं गलत फहमी से कहीं दूर ....
हर एक को खुद के अनुसार कहीं देखता था ...
खुद के अनुसार ही बदलता था...
लेकिन उसे न बदल पाया जिसे बदलना चाहता था.. 
फिर न जाने ऐसा क्या हुआ , 
आज तक मुझे भी इसका जवाब नहीं मिला ..
सबकुछ कहीं खो सा गया ...
मैं कहीं होकर भी कहीं गुम सा गया...
लगा ली तन्हाई को गले कुछ दिन सही..
लेकिन फिर मैंने खुद सोचा...
थोड़ा चला...
थोड़ा ठिठका ..
थोड़ा रुका..
फिर मुड़ा ....
अपनी यादों को कहीं कोने में दफ़न कर आगे चला ..
रोया तो सही कुछ पल के लिए ..
लेकिन फिर परिदों के तरह छत बदल दिया..
खुद की ग़लतफ़हमी को छोड़ खुद में सिमट गया..
 अब करता हूँ हर पल प्यार सिर्फ खुद से.....
और जीता हूँ दिल के उसी कोने में..
जहाँ छिपा रखी है उनकी यादें...
बस उन यादों से ग़लतफहमियां दूर कर रखी हैं ...
यादें बिना  ग़लतफ़हमियां वाली पाल रखी हैं..

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