Thursday, 29 March 2012

Amma

अम्मा : एक कथा गीत थोड़ी थोड़ी धूप निकलती थोड़ी बदली छाई है 

बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है! 

शॉल सरक कर कांधों से उजले पाँवों तक आया है

 यादों के आकाश का टुकड़ा फटी दरी पर छाया है 

पहले उसको फ़ुर्सत कब थी छत के ऊपर आने की 

उसकी पहली चिंता थी घर को जोड़ बनाने की

 बहुत दिनों पर धूप का दर्पण देख रही परछाई है! 

बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है! 


 छोटा मैं था- मुझको तो वह आमों की बगिया लगती थी 

जीवन की इस कड़ी धूप में अब भी वह अमराई है! 

बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है! 

नींद नहीं थी लेकिन थोड़े छोटे-छोटे सपने थे 

हरे किनारे वाली साड़ी गोटे-गोटे सपने थे

 रात रात भर चिड़िया जगती पत्ता-पत्ता सेती थी 

कभी-कभी आँचल का कोना आँखों पर धर लेती थी 

धुंध और कोहरे में डूबी अम्मा एक तराई है!

 बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है! 

बड़े भागते तीखे दिन वह धीमी शांत बहा करती थी

 शायद उसके भीतर दुनिया कोई और रहा करती थी

 खूब जतन से सींचा उसने फ़सल फ़सल को खेत खेत को 

उसकी आँखें पढ़ लेती थीं नदी नदी को रेत रेत को

 अम्मा कोई नाव डूबती बार बार उतराई है! 

बहुत दिनों पर आज अचानक अम्मा छत पर आई है! 

Monday, 26 March 2012

HAR RANG KUCH KEHTA HAI..

हर रंग कुछ कहता है, ये बचपन से सुनता आया था..
मैंने सोचा क्यूँ ना मैं इन रंगों से ही पूछ लूँ..
मैं ने सबसे पहले लाल रंग को जगाया , 
चुठ्कियुं मैं भर कर पूछा ..
क्या तुन भी कुछ कहता है ...
वो थोडा घबराया फिर होले से मुस्कुराया..
धीरे से मेरी  चुठ्कियुं  वाले रंग को ..
मेरी माशूका के मांग मैं पिरोया  
फिर तन  के बोला कुछ और भी कहूँ...
 या अब किसी और की भी मांग भरून..
मुझे तभी समझ मैं आया दौर कर ब्लू रंग से पूछा..
तुन भी कुछ बता अपने बारे मैं मुझे दिखा..
ब्लू रंग मेरे हाथों  से फिल खुले हवा मैं उड़ चला..
और नीले आसमान का साया मेरे उपर बन पड़ा..
दो रंगों के बाद मैं पहुंचा पीले रंग के पास..
उसने हवाओं के थपेरों  को चूम कर खेतों मैं कहीं लह्लाह्या 
सरसों के फूल मैं खिल जोड़ से मुस्कुराया ..
हस कर बोला मेरी से ही सारी प्रेम कहानी 
बिन मेरे सब ही सादी कहानी..
फिर मुझे याद आया मैंने सादगी वाले रंग सफ़ेद को बुलाया..
वो आया लकिन उस रंग ने मुझे रुलाया..
वो इंसान के कफ़न के रूप मैं आया ..
अंतिम यात्रा के साथी  के रूप मैं मैंने उसे पाया था..
फिर मेरी हिम्मत ना हुई किसी और रंग से कुछ पूछने की..
हर रंगों ने मिल कर पूरी जीवन गाथा लिखी..
हर  रंग ने हमें कहीं न कहीं जीना सिखाया..
हर पल मैं हमें  साथ रहना सिखाया..
सो कर न बैर इन रंगों से मेरे दोस्तों .
इनकों आँखों मैं बासाओ और कर लो इनसे दोस्ती..

Friday, 23 March 2012

meri dua mere pyar ke liye..

कोशिश फिर से की उनसे बात करने की..
न हो पाई बात कोई उनसे फिर भी..
मिन्नतें कर रहा हूँ रब तुझसे ये ....
की  एक बार मुझे मेरे यार से मिला ..
जिसके लिए मैंने आंसूं बाह्ये ...उसके दीदार करा दे..
मेरे कान तरस  गए हैं उसकी एक मधुर आवाज़ के लिए ..
सांसे मानो  रुक सी गयी है उसके  एह्श्साश के लिए ..
है मेरी ये दुआ मेरे रब तुझसे ये ...
 तुन एक बार उनका दीदार करा दे..
मेरे प्यार के एह्श्साश को तुन उन तक पहुंचा दे..
करा दे दीदार तुन उनका बस एक बार जरा सा 
मूझे उस दीदार के बाद तुन  बस अपने पास बुला ले..
खता बस मेरी इतनी सी है मेरे खुदा..
की मैं मेरे यार को ही रब समझ बैठा ..
और कर बैठा  उस रब की पूजा..
तुझे मेरे रहमत का वास्ता मेरे खुदा..
बस एक बार तुन मुझे मेरे यार से मिला..
मुझसे हुई है क्या खता बस एक बार तुन मुझे बता..
ऐ खुदा बस एक बार मुझे मेरे सच्चे  प्यार से मिला.. 
या उसे दे दुनिया भर की ख़ुशी और मुझे उसके दुःख से मिला..

Tuesday, 20 March 2012

Balloonwala

रोज वो अपने नन्हे हाथों को धागे में लिपटे  आ जाता..
हाथ थे तो मैले काफी लेकिन जरुरत थी  चेहेरे पर उसके..
हर रंग थे उसके हाथों के उपर,  
सिर्फ उसके पहुँच के दूर ..
देता था वो लोगों को रंग..
लाल, नीली, पिली, हरी ...
हर रंग थे उसने अपने हाथों में भरी..
रंगीन करता था वो लोगों की जिन्दगी 
पर खुद था वो सादा कहीं..
हवाओं को भर गुब्बारे को करता था सुंदर कहीं..
लेकिन हर दिन उन्हीं  हवाओं  के थपेरों को सहता कहीं..
धुप गर्मी बरसात हर मौसम में वो आता था..
रंगों को हाथों में समेटे, 
कुछ खरीदने की मीन्नेते करता था ..
बेचता था वो रंगों वाले गुब्बारे ....
हर गुबारे में बेचता था वो खुशयाँ  
और उन खुश्यों की लेता था कीमत थोड़ी..
शायद खुद का पेट भरने को..
या फिर से रगों वाली खुशयों को फिर हाथों में बांध कर लाने की...
हर रंग को आसमान में उड़ाने की ..
और दूर खड़ी उन रगों को कहीं जाते हुए देखने की..

Monday, 19 March 2012

Yaadain

तुझे भूल जाने को दिल करता है..
आँखों से तुझे हटाने को दिल करता है..
 तुन दिल के जिस कोने में बसी है अब भी..
उस कोने को ही मिटाने  का दिल करता है..
तेरे प्यार में मैं खोया था इस क़द्र 
की अब भी तुझ में खो जाने को दिल करता है..
कोशिश कर लिए तुझे भूलने को बहुत ..
फिर भी तुम में खो जाने को दिल करता है..
तेरी प्यार की छाओं में थी जो शीतलता..
वो अब छोड़ जाने को दिल करता है....
कसक है अब भी दिल में मेरे कहीं..
तुने छोड़ा क्यूँ मुझे बता दे कहीं...
तेरे जवावों के ही सहारे जिन्दगी काट लेता..
न पूछता तुझसे मैं फिर कुछ भी..
बस तेरी उन बातों  के सहारे जिन्दगी काट लेता..
तुझे भूल तो जाता दिल से मगर सासों से अलग न कर पता..
सासों से जो तूं जुदा हो भी जाती ...
तों रूह से तुझे अलग न कर पाता...






Thursday, 15 March 2012

मनमानी

मनमानी करने को अब मन ने ठानी..
 हर दौड़ मैं खुद को आगे होने की ठानी..
शिकवा अब न किसी से कुछ भी..
न गिला ही कोई है अब...
हर किसी को अब है दिल से चाहना...
न किसी से बैर रखना न 
किसी पे ज्यादा विश्वास ही करना..
मनमानी होगी अब सिर्फ दिल की.. 
बस दिल की ही  होगी मनमानी..
आसमान मैं उड़ने की जिद तो ...
चाँद से दो चार बाते करने की जिद..
चाय भी पिए समुन्दर की छाती पर..
और आसमान की गोद मैं सोये बस
मिले या तो सबकुछ या कुछ नहीं....
प्यार भी होगी सिर्फ दिल से अब .. 
जज्बातों  से अब कोई खिलवाड़ न होगा..
हर किसी की मनमानी का एक नया आसमान होगा..
हर दिल के अरमान होंगे मनमानी के साथ..
मनमानी ही मनमानी होगी अब हर पल के साथ..






Wednesday, 14 March 2012

मैं

आज हर कोई बस अपने  "मैं " में कहीं खो सा गया है..
सब के साथ होते हुए भी गुमशुम सा खो गया है..
 जिन्दगी की भागदौड़ में भूल गया है हम को कहीं..
बस मैं और मैं में जी रहा है, भूल सा गया है सबकुछ कहीं   ...
 पैसे और रुतबे के आगे बस अब "मैं"  ही जिन्दा है ....
मांगता है जिन्दगी से भीख तूं बस पैसे की..
खुद के ही आगे बस बरबस सा जिन्दा है तू कहीं ....
अंधे दौड़ मैं ऐ बन्दे तूं चाहता क्या है अब ..
दिल से सोच जरा तूं खुद से मांगता क्या है अब..
अपने "मैं" में ही तूं कहीं खो सा गया है अब..
 सब की भीड़ में गुम हो गया है अब..
ऐ बन्दे सुन मेरी बात सारा गौर से तूं..
छोड़ दे "मैं" की चाहत और पा ले "हम" को तूं..
 मिल जाएगी खुशियाँ साडी , खुद को भी पा लेगा तूं..
हर मंजिल जाएगी फिर तुमसे जुड़ कर ..
तूं फिर हो जायेगा "मैं" से हम फिर..
 कर ले प्यार इस जहाँ के हर बन्दे से..
हर बंदा है यहाँ अपना, तूं खो जा इनमे तू..