रोज देखता हूँ उसे चुपचाप खड़ी ,
भीड़ से कहीं अलग गम सुम सी खड़ी ,
चहेरे पर एक अजब सी सादगी,
मैं देखता हूँ उसे हर दिन और वो भी मुझे बस खड़ी खड़ी ..
लकिन कहता न कुछ बस दोनों गम सुम से खड़े...
उसका पलक छपकना कुछ छुपाता है कहीं ..
लकिन सादगी उसे करती है औरों से अलग कहीं..
रोज देखने उसे आता हूँ जल्दी उसी जगह पर कहीं ..
बस उसकी सादगी को जो उसने ओढ़ रखी है अपने ऊपर कहीं ..
आँखों में बसा रखी है. सुन्दरता जो है अलग कहीं ...
एक अलग सी है वो बिलकुल अलग..
सादे कपड़ों में वो है रंगीन कहीं..
मुझे पसंद है उसकी मुस्कुराहट
जो वो बस हौले से मुस्कुराती है..
शायद कुछ सोच कर किसी बात परकहीं ..
लकिन वो है बस अलग, चुपचाप सी खामोश सी..
और में भी उसे देखता हूँ दूर से खामोश सा चुपचाप सा..
और सोचता हूँ बस ये पल रूक जाये यहीं कहीं यहीं कहीं...
भीड़ से कहीं अलग गम सुम सी खड़ी ,
चहेरे पर एक अजब सी सादगी,मैं देखता हूँ उसे हर दिन और वो भी मुझे बस खड़ी खड़ी ..
लकिन कहता न कुछ बस दोनों गम सुम से खड़े...
उसका पलक छपकना कुछ छुपाता है कहीं ..
लकिन सादगी उसे करती है औरों से अलग कहीं..
रोज देखने उसे आता हूँ जल्दी उसी जगह पर कहीं ..
बस उसकी सादगी को जो उसने ओढ़ रखी है अपने ऊपर कहीं ..
आँखों में बसा रखी है. सुन्दरता जो है अलग कहीं ...
एक अलग सी है वो बिलकुल अलग..
सादे कपड़ों में वो है रंगीन कहीं..
मुझे पसंद है उसकी मुस्कुराहट
जो वो बस हौले से मुस्कुराती है..
शायद कुछ सोच कर किसी बात परकहीं ..
लकिन वो है बस अलग, चुपचाप सी खामोश सी..
और में भी उसे देखता हूँ दूर से खामोश सा चुपचाप सा..
और सोचता हूँ बस ये पल रूक जाये यहीं कहीं यहीं कहीं...
lots of emotions achi sadgi hai
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