रोज वो अपने नन्हे हाथों को धागे में लिपटे आ जाता..
हाथ थे तो मैले काफी लेकिन जरुरत थी चेहेरे पर उसके..
हर रंग थे उसके हाथों के उपर,
सिर्फ उसके पहुँच के दूर ..
देता था वो लोगों को रंग..
लाल, नीली, पिली, हरी ...
हर रंग थे उसने अपने हाथों में भरी..
रंगीन करता था वो लोगों की जिन्दगी
पर खुद था वो सादा कहीं..
हवाओं को भर गुब्बारे को करता था सुंदर कहीं..
लेकिन हर दिन उन्हीं हवाओं के थपेरों को सहता कहीं..
धुप गर्मी बरसात हर मौसम में वो आता था..
रंगों को हाथों में समेटे,
कुछ खरीदने की मीन्नेते करता था ..
बेचता था वो रंगों वाले गुब्बारे ....
हर गुबारे में बेचता था वो खुशयाँ
और उन खुश्यों की लेता था कीमत थोड़ी..
शायद खुद का पेट भरने को..
या फिर से रगों वाली खुशयों को फिर हाथों में बांध कर लाने की...
हर रंग को आसमान में उड़ाने की ..
और दूर खड़ी उन रगों को कहीं जाते हुए देखने की..
हाथ थे तो मैले काफी लेकिन जरुरत थी चेहेरे पर उसके..
हर रंग थे उसके हाथों के उपर,
सिर्फ उसके पहुँच के दूर ..
देता था वो लोगों को रंग..
लाल, नीली, पिली, हरी ...
हर रंग थे उसने अपने हाथों में भरी..
रंगीन करता था वो लोगों की जिन्दगी
पर खुद था वो सादा कहीं..
हवाओं को भर गुब्बारे को करता था सुंदर कहीं..
लेकिन हर दिन उन्हीं हवाओं के थपेरों को सहता कहीं..
धुप गर्मी बरसात हर मौसम में वो आता था..
रंगों को हाथों में समेटे,
कुछ खरीदने की मीन्नेते करता था ..
बेचता था वो रंगों वाले गुब्बारे ....
हर गुबारे में बेचता था वो खुशयाँ
और उन खुश्यों की लेता था कीमत थोड़ी..
शायद खुद का पेट भरने को..
या फिर से रगों वाली खुशयों को फिर हाथों में बांध कर लाने की...
हर रंग को आसमान में उड़ाने की ..
और दूर खड़ी उन रगों को कहीं जाते हुए देखने की..

Very Nice Mr. Inder u r gifted with this talent of describing life ....................
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